पीठ दर्द
नई जीवनशैली से उपजी स्वास्थ्यगत समस्याओं में पीठ दर्द एक प्रमुख समस्या के रूप में उभरा है। हममें से हर एक कभी-न-कभी इससे ग्रस्त होता ही है। घंटों ऑफिस में कुर्सी पर बैठना, काफी देर तक गाड़ी चलाना, लिफ्ट का प्रयोग, घर के काम और आराम की कमी। आजकल ऑफिसों में अधिकांश काम कम्प्यूटर पर अथवा उसके बिना भी घंटों लगभग एक ही मुद्रा में बैठे-बैठे किए जाते हैं। दफ्तर तथा बाहर के अन्य कामों से जब हम थक-हारकर घर आते हैं, तो यहाँ भी हम गलत-सलत मुद्रा में सुस्ताने बैठ जाते हैं, अधलेटी अवस्था में टीवी देखते हैं या फिर फोन पर लंबी वार्तालाप करते हैं। पहले की जीवनचर्या में जिन सामान्य गतिविधियों से हमारा स्वास्थ्य बना रहता था, वे गतिविधियाँ भी नई जीवनशैली की भेंट चढ़ चुकी हैं।
पीठ दर्द के प्रकार
तेज पीठ दर्द या लंबे समय तक रहने वाला पीठ दर्द,
कॉक्सीडीनिया,
स्याटिका या पैर के निचले हिस्से तक फैलने वाला पीठ दर्द,
मांसपेशियों में ऐंठन।
तेज पीठ दर्द: यह पीठ दर्द ज्यादातर उठने, बैठने की गलत मुद्रा के कारण होता है। थोड़ी सावधानी अपनाने से यह ठीक भी हो जाता है। ऐसे दर्द में दर्द निवारक दवाएं और घरेलू नुस्खे भी आराम देते हैं। थोड़ी सावधानी अपनाकर, बैठने और चलने की ठीक मुद्रा का चयन कर इस समस्या से बचा जा सकता है
बैठने का अनुशासन पालें!
आपने रीढ़ की हड्डी के चित्र में देखा होगा कि वह कुछ लहरदार, कुछ अंग्रेजी के अक्षर "एस" के मानिंद होती है। यह उसकी प्राकृतिक अवस्था है। अक्सर हम बैठते वक्त इस प्राकृतिक अवस्था से छेड़छाड़ कर लेते हैं। रीढ़ जहाँ बाहर की तरफ फूली होना चाहिए, वहाँ उसे अंदर की ओर पिचका देते हैं और जहाँ यह भीतर की ओर आना चाहिए, वहाँ इसे बाहर की ओर धकेल देते हैं। यह सीधे-सीधे समस्या को आमंत्रण देना हुआ। यह सच है कि अधिक देर तक एक ही स्थान पर बैठे रहने से न चाहते हुए भी हम अपना पोश्चर बिगाड़ लेते हैं। इससे बचने का एक तरीका तो यह है कि अधिक देर तक एक ही कुर्सी पर बैठना हो या लंबी ड्राइव पर जाना हो तो कमर के निचले हिस्से व कुर्सी या सीट के बैकरेस्ट के बीच एक छोटा कुशन या फिर रोल किया हुआ टावेल रख लें। इससे रीढ़ की हड्डी का यह हिस्सा अपनी प्राकृतिक अवस्था में बना रहेगा।
ऑफिस में रखें विशेष ध्यान
अगर आप दफ्तर में छः, आठ या इससे अधिक घंटे कम्प्यूटर पर बैठकर काम करते हैं, तो आपकी कुर्सी, टेबल, कम्प्यूटर मॉनीटर व कीबोर्ड का सही प्लेसमेंट बहुत जरूरी है। आपकी पीठ कुर्सी के पिछले हिस्से से टिकी होना चाहिए तथा दोनों पैर जमीन पर सपाट पड़ने चाहिए। कंधे सीधे हों, गर्दन न झुकी हो और न ही आगे या ऊपर की ओर खिंची हुई। मॉनीटर का मध्य भाग आपकी आँखों की सीध में हो। कीबोर्ड इस तरह हो कि उस पर काम करते हुए आपकी कोहनी ९० डिग्री का कोण बनाए। हाँ, हर आधे-पौन घंटे बाद उठकर थोड़ी चहलकदमी करना न भूलें
पीछे की और झुककर पीठ के बल रिलेक्स होना
आप बैठते समय बीच बीच में पीठ के सहारे बैठ कर रिलेक्स होने की आदत डालें ,
जब हाथों ,कन्धों ,या पीठ के ऊपर बाले हिस्से ,मध्य बाले ,या निचले बाले भाग में
दर्द हो तो ,पीछे की तरह झुक पर गर्दन पीछे लटका कर एक दो मिनिट बैठ जाएँ
,आप देखेंगे गर्दन कन्धों या पीठ का दर्द तुरंत गायब हो जायेगा ,इस लिए कभी भी
लगातार एक ही पोजीसन में न बैठें ,थोड़ी थोड़ी देर खुद की सुविधाजनक स्थिति में
बैठते रहें ,आगे झुककर बैठना अधिकतर ,कन्धों का दर्द ,हाथों में दर्द ,पीठ में दर्द
का कारण होता है ,इसलिए जहाँ तक हो या तो पीठ सीधी रख कर बैठें या पीठ का
सहारा लेकर पीछे की तरफ झुक कर बीच बीच में रेलक्स होते रहें ,यह पीछे की और
झुककर पीठ के बल रिलेक्स होना ,साधारणतः थकान के कारण होने बाले अधिकांश
दर्दों से छुटकारा दिलवा देता है ,
कैसे पाएं पीठ दर्द से छुटकारा
-हमेशा सीधे बैठना और चलना चाहिए
-आगे झुकने वाले आसन न करें और ज्यादा दर्द होने पर योग या व्यायाम न करें
-ज्यादा देर तक लगातार कुर्सी पर न बैठें। आधे-आधे घंटे के अंतराल पर उठकर थोड़ी देर टहल लेना चाहिए।
-कोई वजनदार चीज न उठाएं। अगर कभी कुछ वजनदार चीज उठाएं भी तो घुटनों को मोड़कर उठाएं ताकि कमर पर जोर न पड़े।
-अपने भोजन में मछली, अनाज, लौकी, तिल और हरी सब्जियों को शामिल करना फायदेमंद साबित हो सकता है।
-इसके साथ ही विटामिन डी3 और विटामिन सी, कैल्सियम और फास्फोरस से भरपूर आहार भी पीठ दर्द में लाभकारी होता है।
पीठ में ज्यादा दर्द हो तो व्यक्ति को काम नहीं करना चाहिए और उसे आराम करना चाहिए। रोगी को ठोस बिस्तरे पर सोना चाहिए और उस अवस्था में बिल्कुल नहीं सोना चाहिए, जिस अवस्था उसकी रीढ़ की हड्डी मुड़ी रहे। इसके अलावा कभी भी अपनी मर्जी से दर्द निवारक दवाईयां न लें। लापरवाही न करते हुए तुरंत डॉक्टर को दिखाएं।